ग्रह युति 2026: 14 नवंबर को आसमान में चार ग्रहों का महामिलन
· 4 min read
आसमान में जब दो ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आते हैं, तो इसे ग्रह युति कहा जाता है। साल 2026 में देखने लायक कई शानदार ग्रह युतियां होने वाली हैं।5
ग्रह युति आखिर होती क्या है
ग्रह युति तब बनती है जब दो ग्रह हमारे आसमान में एक-दूसरे के बिल्कुल पास दिखाई देते हैं, भले ही असल में वे अंतरिक्ष में करोड़ों मील दूर क्यों न हों।5
ये पास दिखने का कारण यह है कि दोनों ग्रह लगभग एक ही रास्ते पर चलते नजर आते हैं, जिसे क्रांतिवृत्त (ecliptic) कहा जाता है।5 कभी-कभी एक ग्रह दूसरे के ठीक सामने से गुजर जाता है। इस दुर्लभ घटना को ग्रहीय आच्छादन (occultation) कहते हैं।5
अगली ग्रह युति कब दिखेगी
मंगल और अरुण ग्रह जून के अंत और जुलाई 2026 की शुरुआत में सुबह के पूर्वी आसमान में एक-दूसरे के करीब आते दिखेंगे।5
4 जुलाई 2026 की सुबह ये दोनों ग्रह सबसे नजदीक होंगे और एक स्पष्ट ग्रह युति बनाएंगे। उस दिन दोनों ग्रह सूर्योदय से करीब ढाई घंटे पहले उदय होंगे।5
इसके बाद बुध और बृहस्पति की बारी है। अगस्त 2026 की शुरुआत में ये दोनों पूर्वी सुबह के आसमान में करीब आते जाएंगे, जहां बुध नीचे उतरता जाएगा और बृहस्पति ऊपर चढ़ता जाएगा।5
15 अगस्त 2026 की सुबह ये दोनों सबसे करीब नजर आएंगे, जब वे सूर्योदय से लगभग एक घंटा पहले उदय होंगे।5
इसके बाद मंगल और बृहस्पति की अपनी युति 16 नवंबर की सुबह होगी।5
नवंबर में दिखेगा पूरा ग्रह-परेड
14 नवंबर 2026 को आसमान में एक बड़ा नजारा देखने को मिलेगा। बुध, शुक्र, मंगल और बृहस्पति उस सुबह एक साथ जुटते नजर आएंगे।2
उस सुबह ये चारों ग्रह नंगी आंखों से देखे जा सकेंगे, हालांकि बुध को ढूंढना थोड़ा मुश्किल रहेगा क्योंकि यह क्षितिज के बेहद पास और नीचे रहता है।2
जब कई ग्रह इस तरह आसमान के एक ही हिस्से में इकट्ठा हो जाते हैं, तो इसे अक्सर ग्रह परेड (planet parade) कहा जाता है।2
साल के बाकी हिस्से में क्या देखें
सितंबर 2026 में शुक्र शाम की धुंधलक में दिखता रहेगा, वहीं शनि अपने विरोधी बिंदु (opposition) के करीब पहुंचेगा, यानी वह स्थिति जब पृथ्वी शनि और सूर्य के बिल्कुल बीच में आ जाती है।4
वहीं उसी महीने बृहस्पति और मंगल सूर्योदय से पहले दिखाई देंगे, जिसमें बृहस्पति पूर्वी आसमान में नीचे रहेगा जबकि मंगल धीरे-धीरे उनके बीच की दूरी कम करते हुए नवंबर वाली युति की तैयारी करेगा।4
आसमान देखने के शौकीन लोग साल भर के आकाशीय घटनाक्रम की पूरी महीनेवार सूची से इन सभी मुलाकातों पर नजर रख सकते हैं।3
अलग-अलग परंपराओं में ग्रह युति का अर्थ
पश्चिमी ज्योतिष में ग्रह युति को दो ग्रहों की ऊर्जाओं के मिलन के रूप में देखा जाता है, क्योंकि हमारी नजर से देखने पर वे राशिचक्र की एक ही डिग्री साझा करते हैं।7 हमारे सौरमंडल के ग्रह सूर्य के चारों ओर अंडाकार कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं, और उनकी एक-दूसरे के सापेक्ष बदलती स्थिति ही इन युतियों को जन्म देती है।7
कुछ परंपराओं में दुर्लभ त्रि-ग्रह युति को खास महत्व दिया जाता है, जिसमें एक साथ तीन ग्रह जुटते हैं और इसे आम दो-ग्रह युति से कहीं अधिक प्रभावशाली माना जाता है।7
वैदिक ज्योतिष में इसे ग्रह युति ही कहा जाता है, जो संस्कृत शब्द है और इसका मतलब है दो या उससे अधिक ग्रहों का एक ही समय में एक ही राशि में मौजूद होना।6
इस परंपरा में कुछ खास युति पैटर्न को योग नाम दिया गया है, जिनका अपना विशेष स्वभाव और असर माना जाता है।6
ज्योतिष को हल्के में लें, गंभीरता से नहीं
आप चाहे जिस भी परंपरा में विश्वास रखते हों, ग्रह युति को अपने जीवन पर कोई फैसला मानने के बजाय, कुछ महसूस करने और समझने का एक न्योता मानें।
मंगल-बृहस्पति की जोड़ी शायद आपको साहसिक और बड़े कदम उठाने की हल्की सी प्रेरणा जैसी महसूस हो सकती है।
इन पलों को आत्म-चिंतन के आईने की तरह देखें।
जानना चाहते हैं कि आपकी अपनी जन्म कुंडली इस ग्रह-मिलन पर कैसी प्रतिक्रिया देती है? अपनी पूरी कॉस्मिक प्रोफाइल देखें और जानें कि ये पैटर्न आपके लिए क्या मायने रख सकते हैं।